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Showing posts from July, 2021
उनकी औकात ही क्या मुझसे टकराने की वो क्या शेर को दावत देंगें क्या उनकी औकात भी है शेर को खिलाने की
उनका आंचल मेरे चहरे पे जब लहराया मेरे चहरे पे ताजगी लाया
हर कोई राज छुपा रहा है अपना होकर हमसे राज ले रहे हैं अपना कहकर
पता नहीं लोग बात बात में केसे रो देते हैं हम तो तकलीफ में भी नहीं रो पाते हैं
मैंने जो भी गुनाह किया खुद किया अपने गुनाहों में किसी को सामिल न किया 
मैंने तो एक अपने से मोहब्बत की थी फिर भी वफा न मिल सकी गैर से मोहब्बत करके क्या ख़ाक वफा मिलेगी
जब भी तेरी गली (दहलीज़) से गुजरा देखना चाहा तेरा चेहरा
रहमत के हजार नजारे होंगें देखने वाले तारे होंगें  तेरे मेरे कुछ किस्से होंगें तेरे साथ गुजरे कुछ हिस्से होंगें
लोगो के अलफ़ाज मीठे जरूर हैं मगर दुख देते हैं चाय कड़वी जरूर होती मगर सुकून देती है    Noman FikRi